
उत्तराखंड: 01 May 2026, शुक्रवार को देहरादून/राजधानी में देहरादून/ऋषिकेश एम्स में अंगदान से युवती ने दी तीन लोगों को नई जिंदगी, एम्स ऋषिकेश में पहली बार लीवर ट्रांसप्लांट सफल ऋषिकेश, 01 मई (वार्ता) उत्तराखंड में ऋषिकेश अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में अंगदान की एक प्रेरणादायक मिसाल सामने आई है , एक दर्दनाक सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल 23 वर्षीय युवती ने मौत के बाद भी तीन लोगों को नई जिंदगी दे दी। बीते 21 अप्रैल से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में भर्ती युवती को चिकित्सकों ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया था। इसके बाद परिजनों की सहमति से हुए अंगदान ने तीन मरीजों के जीवन में नई उम्मीद जगा दी।
एम्स ऋषिकेश के चिकित्सकों की टीम ने इस दौरान ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए राज्य का पहला लीवर ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया, जबकि दो मरीजों को किडनी प्रत्यारोपण कर नया जीवन दिया गया। बीते तीन वर्षों में यह संस्थान का 23वां किडनी ट्रांसप्लांट रहा।
युवती के परिजनों ने गहरे दुख के बीच अंगदान का निर्णय लेकर मानवता की मिसाल पेश की। चिकित्सकों की सलाह पर उन्होंने लिखित सहमति दी, जिसके बाद अंगों का सफल प्रत्यारोपण किया गया। इस पूरी प्रक्रिया में विशेषज्ञों की संयुक्त टीम ने करीब 13 घंटे तक लगातार ऑपरेशन कर जीवन बचाने की जंग लड़ी।
एक साथ हुए किडनी और लीवर ट्रांसप्लांट
एम्स ऋषिकेश में पहली बार एक ही समय में किडनी और लीवर प्रत्यारोपण की जटिल प्रक्रिया को अंजाम दिया गया। एक मरीज को लीवर और दूसरे को किडनी प्रत्यारोपित की गई। वहीं, एक किडनी और पेनक्रियाज ग्रीन कॉरिडोर के जरिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान नई दिल्ली भेजे गए, जहां उनका भी सफल प्रत्यारोपण हुआ
अंगों के आवंटन की प्रक्रिया राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन के सहयोग से पूरी की गई, जिसके माध्यम से जरूरतमंद मरीजों की पहचान कर अंग उपलब्ध कराए गए। इस जटिल सर्जरी में देश-विदेश के विशेषज्ञों की टीम शामिल रही। अहमदाबाद के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. प्रांजल मोदी के मार्गदर्शन में एम्स ऋषिकेश के डॉक्टरों ने समन्वित प्रयासों से इस चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया को सफल बनाया। एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक प्रो. डॉ. मीनू सिंह ने इसे संस्थान की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह केवल शुरुआत है। भविष्य में भी संस्थान अंगदान और प्रत्यारोपण के क्षेत्र में तेजी से कार्य करेगा और लोगों को इसके प्रति जागरूक करेगा।
युवती के इस त्यागपूर्ण निर्णय ने यह साबित कर दिया कि अंगदान केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि कई जिंदगियों को बचाने का सबसे बड़ा माध्यम है।



