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सीओ निहारिका ST का सर्टिफिकेट वह अवैध है-HC

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उत्तराखंड: 18 AUG. 2026,  देहरादून। उत्तराखंड (कुमाऊँ) में नैनीताल हाईकोर्ट ने ऊधम सिंह नगर में तैनात सर्किल आफिसर (सीओ) नीरज सेमवाल और चम्पावत में तैनात उनकी पत्नी निहारिका सेमवाल की मुसीबतें बढ़ गयी हैं। नैनीताल हाईकोर्ट ने क्यू वारंटो के तहत दाखिल की गयी एक याचिका की सुनवाई करते हुए निहारिका सेमवाल से अनुसूचित जनजाति का प्रमाणपत्र दो सप्ताह में तलब किया है। याचिका में यह चुनौती दी गयी है कि निहारिका ब्राह्मण हैं और उन्होंने गलत तरीके से अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र हासिल किया है। इसके अलावा विजिलेंस कोर्ट ने सीओ नीरज सेमवाल को आय से अधिक संपत्ति के मामले में दाखिल एक शिकायत के आधार पर नोटिस जारी कर दिया है। इसके साथ ही निहारिका सेमवाल द्वारा सरोजबाला के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज मामले में नया मोड़ आ गया है।

उत्तराखंड पुलिस में कार्यरत एक महिला सरोजबाला रावत ने हाईकोर्ट में क्यू वारंटो के तहत याचिका दाखिल कर चुनौती दी कि सीओ निहारिका सिंबल सेमवाल अनुसूचित जनजाति की नहीं हैं और वो ब्राह्मण हैं। ऐसे में उन्होंने जौनसार क्षेत्र से जो अनुसूचित जनजाति का सर्टिफिकेट हासिल किया है वह अवैध है। उसने चुनौती दी है कि इसी अवैध प्रमाणपत्र के आधार पर निहारिका को पुलिस में नौकरी मिली है। इस मामले की सुनवाई सीजे मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस सुभाष उपाध्याय की अदालत में हो रही है। हाईकोर्ट ने इस मामले में निहारिका सेमवाल से जनजातीय प्रमाणपत्र तलब किया है। यह उत्तराखंड का इस तरह का पहला मामला है जिसकी हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है।

एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज मामले की सुनवाई देहरादून की जिला अदालत में चल रही है। वहीं, सीओ नीरज सेमवाल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में गढ़वाल क्षेत्र भ्रष्टाचार रोधी स्पेशल जज अंजलि बेंजवाल ने नोटिस जारी कर 9 सितम्बर को अदालत में अपने समर्थन में साक्ष्य जमा करने के आदेश दिये हैं। सीओ नीरज सेमवाल को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2018 संशोधित की धारा 13 एक बी और 13 दो के तहत यह नोटिस जारी किया है।

गौरतलब है कि नीरज और निहारिका सेमवाल पति पत्नी हैं। सीओ निहारिका ने सरोजबाला के खिलाफ देहरादून में एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया है। इस मामले में सरोजबाला को जेल भी जाना पड़ा। सरोजबाला ने अदालत में कहा कि निहारिका चूंकि अनुसूचित जनजाति से नहीं हैं, इसलिए उसके खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज मुकदमा रद्द किया जाए और निहारिका ने गलत प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी हासिल की है तो उसे नौकरी से हटाया जाएं। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 28 नवम्बर 2000 के बाद अनुसूचित जनजाति के तहत जारी किये गये सभी प्रमाणपत्र अवैध हैं। इस प्रमाण पत्र के आधार पर हासिल की गयी नौकरी और अन्य लाभ शून्य हैं।

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