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ऑटिज्म दिवस : समाज की चेतना का प्रतीक बनता-डॉ.दीक्षित

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न्यूज डेस्क / उत्तराखंड: 01 April 2026, बुधवार को देहरादून । उत्तराखण्ड में सूबे के सबसे बड़ो महाविद्यालय डीएवी पीजी कालेज देहरादून के  एसोसिएट प्रोफेसर-डॉ रवि शरण दीक्षित के अनुसार  बाल्यावस्था से संकेत को ना समझ पाना,संकेत पर प्रतिक्रिया ना देना साथ ही साथ वार्तालाप में कहीं ना कहीं एक अंतराल, वर्तमान समय में मोबाइल छीन लेने पर अत्यधिक गुस्सा भी इसके प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है जिसको समय के साथ-साथ किसी शिशु के विकास में एक बाधा के रूप में देखा जाता है ।

शिशु अवस्था बाल्य,युवावस्था में इसको समझाना और इसको निवारण करना जिससे बालक अथवा युवा का सामान्य विकास हो सके और इसी के लिए समाज में जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं जिसकी परिणीति आज समाज में दिवस के रूप में मना कर समाज को एक संदेश देने का प्रयास किया जाता है ।

ऑटिज्म एक न्यूरोडेवलपमेंटल विकार है जो सामाजिक संपर्क, संचार और व्यवहार को प्रभावित करता है। इसके लक्षण बचपन में दिखने लगते हैं और जीवनभर रहते हैं यदि उनका यथोचित निवारण न किया गया ऑटिज्म के कारणों में जेनेटिक और पर्यावरणीय कारक शामिल हैं, लेकिन अभी तक इसके सटीक कारणों का पता नहीं चल पाया है
मुख्य रूप से इनके निम्न कारण देखे जा सकते हैं ।

– जेनेटिक कारक: ऑटिज्म के पीछे जेनेटिक कारक एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि परिवार में कोई ऑटिस्टिक व्यक्ति है, तो अन्य सदस्यों में ऑटिज्म होने की संभावना बढ़ जाती है।
– पर्यावरणीय कारक: गर्भावस्था के दौरान वायरल संक्रमण, मजबूत दवाएं, पर्यावरण प्रदूषण और माता-पिता की अधिक उम्र जैसे कारक ऑटिज्म के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।
– मस्तिष्क के विकास में असामान्यता: ऑटिज्म मस्तिष्क के विकास में असामान्यता के कारण हो सकता है, जिससे सामाजिक संपर्क और संचार में कठिनाइयां होती हैं

ऑटिज्म के प्रभाव- सामाजिक संपर्क में कठिनाई: ऑटिज्म से पीड़ित व्यक्तियों को सामाजिक संपर्क में कठिनाई होती है, जिससे उन्हें दूसरों के साथ संबंध बनाना मुश्किल होता है, संचार में समस्या जो वास्तव में सामने देखा है पीड़ित व्यक्तियों को संचार में कठिनाई होती है, जिससे उन्हें अपने विचारों और भावनाओं को व्यक्त करना मुश्किल होता है,व्यवहार में असामान्यता: ऑटिज्म से पीड़ित व्यक्तियों में व्यवहार में असामान्यता होती है, जैसे कि दोहराव वाला व्यवहार और जुनूनी व्यवहार

ऑटिज्म के समाधान कारक के रूप में निम्न बिंदुओं को समझा जा सकता है- ऑटिज्म का प्रारंभिक निदान और उपचार बहुत महत्वपूर्ण है। इससे व्यक्तियों को उनके लक्षणों को प्रबंधित करने और उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद मिल सकती है, जिसमें भावनात्मक संरक्षण बहुत महत्वपूर्ण है,ऑटिज्म के लिए विभिन्न प्रकार की थेरेपी उपलब्ध हैं, जैसे कि स्पीच थेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी और व्यवहार थेरेपी। परिवार का समर्थन ऑटिज्म से पीड़ित व्यक्तियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इससे उन्हें अपने लक्षणों को प्रबंधित करने और उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद मिल सकती है जिससे समस्या से सहज भाव में बच्चों को निकाला जा सकता है और उनको सामाजिक जीवन में प्रभावशाली तरीके से सम्मिलित किया जा सकता है ।

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