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HNBU: डिजिटल युग में “क्या खोया और क्या पाया” जैसे महत्वपूर्ण प्रश्नों को उठाया
डिजिटल युग में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और पॉप कल्चर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ

उत्तराखंड: 07 Sep. 2026, श्रीनगर गढ़वाल, । हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय श्रीनगर गढ़वाल के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग द्वारा “डिजिटल युग में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और पॉप कल्चर” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। उद्घाटन सत्र में बतौर कार्यक्रम अध्यक्ष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्री प्रकाश सिंह तथा मुख्य अतिथि के रूप में गढ़ गौरव लोकगायक श्री नरेंद्र सिंह नेगी तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में उत्तराखंड सरकार के मीडिया अध्यक्ष प्रो गोविन्द सिंह एवं जागर सम्राट पद्मश्री डॉ. प्रीतम भरतवाण उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय संगोष्ठी के अवसर पर मुख्य अतिथि श्री नरेंद्र सिंह नेगी ने विश्वविद्यालय में संचालित शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक गतिविधियों की सराहना करते हुए डिजिटल युग के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विचार व्यक्त किए। उन्होंने लोकगायक के रूप में अपनी अब तक की यात्रा के माध्यम से लोक संस्कृति के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों ने कलाकारों को सृजनात्मक स्वतंत्रता के साथ-साथ व्यापक सांस्कृतिक आदान-प्रदान के नए अवसर उपलब्ध कराए हैं। उन्होंने वर्तमान डिजिटल दौर की संभावनाओं और चुनौतियों पर चर्चा करते हुए उभरते गीतकारों एवं कलाकारों से लोकसंस्कृति के मूल स्वरूप और लोकजीवन से जुड़े गीतों के सृजन का आह्वान किया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्री प्रकाश सिंह ने हिंदी विभाग द्वारा आयोजित संगोष्ठी के लिए आयोजन मंडल को बधाई देते हुए विषय की प्रासंगिकता को रेखांकित किया।
विशेष उद्बोधन में जागर सम्राट पद्मश्री डॉ. प्रीतम भरतवाण ने पर्वतीय लोक संस्कृति और लोकगीत परंपरा के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली विभूतियों को नमन किया तथा लोक के विविध पक्षों की व्याख्या की।
इससे पूर्व प्रो. मंजुला राणा ने अपने स्वागत उद्बोधन में सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए डिजिटल युग में “क्या खोया और क्या पाया” जैसे महत्वपूर्ण प्रश्नों को उठाया।
डिजिटल युग में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और पॉप कल्चर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ
श्रीनगर गढ़वाल, 07 सितंबर। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग द्वारा “डिजिटल युग में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और पॉप कल्चर” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ।
मुख्य अतिथि श्री नरेंद्र सिंह नेगी ने विश्वविद्यालय में संचालित शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक गतिविधियों की सराहना करते हुए डिजिटल युग के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विचार व्यक्त किए।
अध्यक्षीय उद्बोधन में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह ने हिंदी विभाग द्वारा आयोजित संगोष्ठी के लिए आयोजन मंडल को बधाई देते हुए विषय की प्रासंगिकता को रेखांकित किया।
विशेष उद्बोधन में जागर सम्राट पद्मश्री डॉ. प्रीतम भरतवाण ने पर्वतीय लोक संस्कृति और लोकगीत परंपरा के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली विभूतियों को नमन किया तथा लोक के विविध पक्षों की व्याख्या की। उन्होंने वर्तमान समय को केवल ‘कलियुग’ न मानकर ‘करयुग’ बताते हुए पर्वतीय लोकजीवन में निहित कर्म के महत्व को प्रतिपादित किया।
उद्घाटन सत्र के समापन पर संगोष्ठी के संयोजक डॉ. कपिल देव पंवार ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए संगोष्ठी के विषय की प्रासंगिकता को रेखांकित किया।
उद्घाटन समारोह के अवसर पर लोकगायिका अनुराधा निराला, प्रो कुलसचिव प्रो वाई पी रैवानी, छात्र सलाहकार प्रो एमएम सेमवाल, एमएमटीटीसी के निदेशक प्रो डी एस नेगी, चौरास परिसर के उप निदेशक प्रो राजेंद्र सिह नेगी, प्रो. मोनिका गुप्ता मेम, प्रो जी. पी. भट्ट, प्रो. एम. एस. नेगी, प्रो. वी. पी. नेथानी, प्रो. गुड्डी बिष्ट, डॉ. विश्वेश वाग्मी, डॉ. चंद्रशेखर जोशी, डॉ सविता भंडारी, डॉ आरुषि उनियाल, डॉ सुभाष चन्द्र , डॉ नितिन, । डॉ. शंकर परगाई जनसंपर्क अधिकारी आशुतोष बहुगुणा , इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय के अन्य अतिथि शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने शिरकत की। सह–संचालक की भूमिका में डॉ अनूप सेमवाल रहे।



