अयोध्या में बनेगा ‘देवभूमि का परिचय केंद्र’विजन को धरातल पर उतारने की दिशा

वही जिसमें अयोध्याधाम में बनने वाला उत्तराखंड का राज्य अतिथि गृह केवल सरकारी आवासीय सुविधा के रूप में विकसित नहीं किया जाएगा। इसकी कल्पना ऐसे भवन के रूप में की गई है, जहां प्रवेश करते ही उत्तराखंड की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विविधता की झलक दिखाई दे। करीब 6783.33 लाख रुपये के विस्तृत आगणन वाले इस भवन की डिजाइन में पारंपरिक पहाड़ी वास्तुशैली को प्रमुखता देने के निर्देश दिए गए हैं। भवन की आंतरिक सज्जा में भी उत्तराखंड की विशिष्ट पहचान को प्रमुखता मिलेगी। सबसे खास बात यह है कि भवन के अलग-अलग तल अलग-अलग थीम पर आधारित होंगे। ओम पर्वत, ग्लेशियर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क और पंचाचूली पर्वत शिखर जैसे उत्तराखंड के प्रमुख प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक प्रतीकों को भवन की थीम का हिस्सा बनाने की योजना है। इसका मकसद साफ है-अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को केवल उत्तराखंड के अतिथि गृह में ठहरने का अनुभव न मिले, बल्कि उन्हें देवभूमि की संस्कृति, प्रकृति और स्थापत्य से भी परिचित होने का अवसर मिले।
प्रस्तावित भवन की मूल योजना में शामिल ‘बारात घर’ को हटाने का निर्णय भी लिया गया। इसके स्थान पर भवन को पूरी तरह अतिथि गृह के निर्धारित मानकों और आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं।
साथ ही संशोधित योजना में लागत को नियंत्रित करने के साथ सुविधाओं को अधिक उपयोगी बनाने पर जोर दिया गया है। बाउंड्रीवाल की ऊंचाई कम कर उसके स्थान पर लोहे की ग्रिल लगाने का प्रावधान किया गया है। इससे परियोजना की लागत में कमी आई है। टीएसी और नियोजन विभाग द्वारा आगणन के परीक्षण के बाद 14 अगस्त 2026 को हुई विभागीय व्यय समिति की बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुरूप संशोधन किए गए। कार्यदायी संस्था उत्तराखंड पेयजल संसाधन विकास एवं निर्माण निगम, उधमसिंहनगर की ओर से संशोधित प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। समिति ने संशोधित आगणन पर सैद्धांतिक सहमति प्रदान करते हुए प्रस्ताव को व्यय वित्त समिति के अनुमोदन के लिए प्रस्तुत करने का निर्णय लिया।
फाइल से फील्ड तक-विकास का एक साझा सूत्र-इन दोनों परियोजनाओं में एक महत्वपूर्ण समानता दिखाई देती है। अयोध्या का अतिथि गृह उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को प्रदेश से बाहर मजबूत करने का माध्यम बनेगा, तो रुद्रपुर का स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स प्रदेश के भीतर युवा प्रतिभाओं को आधुनिक अवसर देने का आधार तैयार करेगा। एक परियोजना में पहाड़ की संस्कृति और प्राकृतिक विरासत की झलक होगी, दूसरी में मैदान पर पसीना बहाते युवाओं के सपनों को नई दिशा मिलेगी।



