
उत्तराखंड: 21 AUG. 2026, देहरादून / राजधानी स्थित सूत्रो के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार सूबे के सबसे बड़े राजकीय दून मेेडिकाल कॉलेज अस्पताल देहरादून में मेडिकल कॉलेज में नियुक्ति और वेतन वितरण में धांधली की आशंका, कर्मचारियों में असंतोष है। सूत्रो के मुताबिक दून अस्पताल के उपनल कर्मी एवं समिमि के माध्यम से लगे स्वास्थ कर्मीयों में वेतन विसंगति को लेकर आसंतोष है। जिसमें कुशल कर्मी, आकुशल कर्मी, तकनिकी, लेब तकनिकी,कम्प्यूटर ऑपरेटर आदि कर्मीयों को लेकर वेतन मान में हो रही धांधली का आरोप कई कर्मीयो ने दबी जुबान से लगाया। इस संबंध में सूत्रो के अनुसार कई संविदा कर्मचारी राजकीय दून मेेडिकाल कॉलेज के कर्मचारियों में वेतन वितरण और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक बातचीत के दौरान यह सामने आया है कि 1 अप्रैल 2016 को नियुक्ति पाने वाले कुछ चुनिंदा कर्मचारियों को तो बढ़ा हुआ वेतन और अन्य लाभ मिल रहे हैं, जबकि कई अन्य कर्मचारियों को इससे वंचित रखा गया है।ये उपनल कर्मी अहम भूमिका निभाते हैं, हालांकि समय-समय पर इनकी हड़ताल या अन्य प्रशासनिक मुद्दों के कारण चर्चा में रहते हैं।
मुख्य बिंदु: वेतन विसंगति और भेदभाव: सभी कर्मचारियों की वेरिफिकेशन लिस्ट के अनुसार नियुक्ति तिथि 1 अप्रैल 2016 होने के बावजूद, सूची में नीचे के कुछ कर्मचारियों को बढ़ा हुआ वेतन और लाभ मिलने की बात सामने आई है।
निचले स्तर के कर्मचारियों को लाभ: बातचीत में यह भी बताया गया कि न्यूरोसर्जन के साथ ओटी में रहने वाले कर्मी सहित कुछ अन्य लोगों को भी इसका लाभ मिल रहा है, जबकि बाकी 22 कर्मचारियों को इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया है।
पारदर्शिता का अभाव: आरोप लगाया जा रहा है कि मेडिकल कॉलेज के एफसी (FC) ऑफिस और संबंधित अधिकारियों द्वारा इस मामले में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है और अंदरखाने कोई खेल चल रहा है।
साथ ही इस कार्रवाई की तैयारी: कर्मचारी इस मामले की सच्चाई का पता लगाने के लिए एफसी ऑफिस और उच्च स्तर पर दस्तावेजों की पड़ताल करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि समान नियुक्ति तिथि होने के बावजूद कुछ ही लोगों को इसका अनुचित लाभ क्यों मिल रहा है।
नोट: इस मामले में संबंधित अधिकारियों की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन कर्मचारियों में इसे लेकर भारी नाराजगी और असमंजस की स्थिति बनी हुई है। क्या आप इस खबर से संबंधित किसी विशेष अधिकारी या विभाग का पक्ष भी इसमें जोड़ना चाहते हैं?
सूत्रो के मुताबिक सत्यापन सूची: पुनरीक्षण (verification) के बाद कुल 67 लोग बचे थे, जिनमें से अधिकारियों ने केवल 39 लोगों का बढ़ा हुआ वेतन जारी किया है। वही जिसमें बचे हुए कर्मचारी: बाकी बचे हुए करीब 22-28 लोग (जिनमें वक्ता भी शामिल हैं) बढ़े हुए वेतन से छूट गए हैं, जिनका नाम सूची में शामिल नहीं किया गया है।
अधिकारियों से पूछताछ: इस मामले पर स्पष्टीकरण मांगने के लिए कर्मचारी कल संबंधित अधिकारियों (प्रचार्या/एफ़सी आदि) के पास जाकर पूछताछ करेंगे कि उनके साथ ऐसा भेदभाव क्यों किया गया है। आगे की कार्रवाई: से छूटे हुए कर्मचारियों का बढ़ा हुआ वेतन भी जल्द जारी हो सके।



