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दून अस्पताल की सियासत या निजी वजह? डिप्टी एमएस के इस्तीफे ने बढ़ाई हलचल

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उत्तराखंड: 14 JUNE 2026, देहरादून/राजधानी में सूबे के सबसे बड़े राजकीय दून मेडिकल कालेज अस्पताल देहरादून सूर्खियो पर हमेशा रहता है। वही जिसमें प्राप्त जानकारी के अनुसार न मेडिकल कॉलेज के डिप्टी MS यानी कि उप चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर नंदन सिंह बिष्ट ने इस्तीफ़ा दे दिया है । बताया जा रहा है कि दून मेडिकल कॉलेज के डिप्टी MS और मुख्यमंत्री धामी के फिजिशियन डॉक्टर नंदन सिंह बिष्ट ने निजी कारणों के चलते इस्तीफ़ा दिया है , जबकि सूत्रों कहना है कि अस्पताल में पिछले कुछ समय से विभिन्न प्रशासनिक और वित्तीय मामलों को लेकर चर्चाएं चल रही हैं।

जिसमें  दून मेडिकल कॉलेज की प्राचार्या डॉ. गीता जैन ने इस्तीफे की पुष्टि करते हुए बताया कि डॉ. बिष्ट ने चार दिन पहले अपना त्यागपत्र भेजा था, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। आधिकारिक तौर पर इस्तीफे की वजह निजी कारण बताई जा रही है। सूत्रों की मानें तो डॉ बिष्ट के इस्तीफ़े के पीछे आपसी खींचतान को भी माना जा रहा है । जिसमें आयुष्मान योजना से जुड़े मामलों और हाल ही में सामने आए मैस संबंधी अनियमितताओं की जांच भी शामिल है।डाक्टर एन एस बिष्ट ओटी इमेरजेंसी के इंचार्ज भी थे।

डाक्टर एन एस बिष्ट जी के इस्तीफे की खबर विचलित करने वाली है, निहाइती ईमानदार कर्मठ डाक्टर जो गरीबों के लिये मसीहा से कम नहीं थे। कहा जा रहा है कि एक ईमानदार डाक्टर अपने कर्तव्य का निर्वाहन नहीं कर सका मजबूरी में इस्तीफा दे दिया। सूत्रों का यह भी कहना है कि अस्पताल प्रशासन के भीतर चल रही कथित खींचतान को भी इस इस्तीफे से जोड़कर देखा जा रहा है।

इनमें आयुष्मान योजना से जुड़े मुद्दे, हाल ही में सामने आए मैस संबंधी अनियमितताओं के मामले और अन्य प्रशासनिक विषय शामिल बताए जा रहे हैं।  हालांकि, इन चर्चाओं की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही डॉ. नंदन सिंह बिष्ट की ओर से इस संबंध में कोई सार्वजनिक बयान जारी किया गया है। ऐसे में एक वरिष्ठ अधिकारी का अचानक इस्तीफा कई सवाल खड़े कर रहा है।

फिलहाल स्वास्थ्य महकमे और आम लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि डॉ. बिष्ट के इस्तीफे के बाद इस महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाएगी और अस्पताल प्रशासन आगे क्या कदम उठाएगा।  सवाल यह भी उठ रहे हैं कि यदि राजधानी के प्रमुख अस्पताल में अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय नहीं दिखाई देता, तो दूरस्थ क्षेत्रों के स्वास्थ्य संस्थानों की स्थिति कैसी होगी?

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