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यह मरकर भी अमर होने की अनूठी मिसाल है: एम्स

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उत्तराखण्ड: 23 Jan. 2025 शुक्रवार को देहरादून।एम्स ऋषिकेश।  यह मरकर भी अमर होने की अनूठी मिसाल है। ऋषिकेश का 42 वर्षीय रघुवीर भले ही अब इस दुनिया में नहीं रहा लेकिन दान किए गए उनके अंगों से 5 अन्य लोगों का जीवन वापिस लौट आयेगा। ब्रेन डेड हो चुके इस व्यक्ति के केडवरिक ऑर्गन डोनेशन की यह प्रक्रिया एम्स ऋषिकेश में शुक्रवार को संपन्न हुई जो पूर्ण तौर से सफल रही। यह दूसरा अवसर है जब एम्स ने ऑर्गन डोनेशन की इस प्रक्रिया को अंजाम तक पंहुचाया है।

मूल रूप से बिहार का रहने वाला रघुवीर राजमिस्त्री था। हाल ही में कुछ दिन पहले हुई एक दुर्घटना के दौरान उन्हें गंभीर चोटें आ गयीं। स्थिति नाजुक होने पर उन्हें अगले दिन एम्स में भर्ती कराया गया लेकिन इससे पहले कि ट्राॅमा सर्जन सर्जरी की तैयारी करते, रघुवीर की स्थिति पल दर पल बिगड़ती चली गयी और वह नाॅन रिवर्सिवल कोमा में चले गए। संस्थान के न्यूरो सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. रजनीश अरोड़ा ने बताया कि लाख प्रयासों के बावजूद जब वह कोमा से वापिस नहीं आए तो विभिन्न जांचों के उपरान्त इलाज कर रहे विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमेटी द्वारा उन्हें बीते रोज ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया।

इस पर संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह के सुपरविजन में चिकित्सकों की एक टीम ने रघुवीर के परिवार वालों से संपर्क कर उन्हें अंगदान के प्रति प्रेरित किया। साथ ही ऋषिकेश मेयर शम्भू पासवान ने भी इस मामले में सक्रिय भूमिका निभायी और व्यक्तिगत रूचि लेकर अंगदान के प्रति परिजनों की काउंसिलिंग की। बाद में परिवार वालों के राजी होने पर ब्रेन डेड इस व्यक्ति के अंगदान का फैसला लिया गया। प्रक्रिया के बाद रघुवीर के अंगदान से अब न केवल 5 लोगों की जिंन्दगी वापिस लौट आयेगी बल्कि दृष्टि खो चुके 2 अन्य लोग भी अब रघुवीर द्वारा किए गए नेत्रदान से जीवन का उजियारा देख सकेंगे।

एम्स के प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. भारत भूषण भारद्वाज ने बताया कि ब्रेन डेड युवक के अंगदान का यह फैसला कई लोगों का जीवन लौटाने के काम आया है। डॉक्टरों के मुताबिक रघुवीर के अंगदान से 3 अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती 5 लोगों को नया जीवन मिल सकेगा। इनमें पीजीआई चण्डीगढ़ में भर्ती 3 अलग-अलग व्यक्तियों को किडनी, लीवर और पेन्क्रियाज, एम्स दिल्ली में भर्ती रोगी को रघुवीर की दूसरी किडनी और आर्मी हाॅस्टिपटल आर.आर दिल्ली में भर्ती एक रोगी को हार्ट प्रत्यारोपित किया जाना है। उन्होंने बताया कि रघुवीर ने अपनी दोनों आंखें भी दान की हैं। निकाली गयी दोनों काॅर्निया को एम्स के आई बैंन्क में सुरक्षित रखवा दिया गया है। जिन्हें शीघ्र ही जरूरतमंदों की आंखों में प्रत्यारोपित कर दिया जायेगा।

ग्रीन कोरिडोर के लिए ली 9 जनपदों की पुलिस की मदद डाॅ. भारत ने बताया कि विभिन्न अंगों को निर्धारित समय के भीतर गंतव्य तक पंहुचाने के लिए उत्तराखंड, यूपी और दिल्ली के 9 जिलों की पुलिस से ग्रीन कोरीडोर बनाने के लिए मदद ली गयी। ताकि सभी अंगों की निश्चित समय के भीतर सम्बंधित अस्पतालों तक पंहुचाया जा सके। इसमें एम्स ऋषिकेश से जौलीग्रांट एयरपोर्ट, ऋषिकेश से दिल्ली और चण्डीगढ़ स्थित अस्पताल तक का रूट शामिल था। अपरान्ह समय अस्पताल प्रशासन द्वारा सम्मान के साथ रघुवीर की देह एम्स ऋषिकेश से गन्तव्य स्थान के लिए भिजवायी गयी।

इन डाॅक्टरों की रही विशेष भूमिका- इस प्रक्रिया में एम्स के न्यूरो सर्जन डाॅ. रजनीश अरोड़ा के अलावा डाॅ. संजय अग्रवाल, डाॅ. रोहित गुप्ता, डाॅ. अंकुर मित्तल, डाॅ. करमवीर, डाॅ. नीति गुप्ता, डाॅ. मोहित धींगरा, डाॅ. लोकेश अरोड़ा, डाॅ. आशीष भूते और डाॅ. आनन्द नागर आदि विशेषज्ञ शामिल थे। संस्थान में अंग प्रत्यारोपण इकाई के समन्वयक देशराज सोलंकी व डीएनएस जीनू जैकेब की टीम का सहयोग रहा जबकि संस्थान के पीआरओ डाॅ. श्रीलोय मोहन्ती और डीएमएस डाॅ. रवि कुमार आदि ने राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन ( नोटो ) और संबन्धित जिला प्रशासन व अस्पतालों सहित विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर पूरी प्रक्रिया में विशेष भूमिका निभायी।

’’एम्स ऋषिकेश में केडवरिक ऑर्गन डोनेशन का यह दूसरा मामला है। अंगदान महादान है। हमें चाहिए कि हम समाज में भी लोगों को अंगदान के प्रति जागरूक करें। इस प्रक्रिया में शामिल डाॅक्टरों की टीम का कार्य प्रशंसनीय है।’’

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