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जौनसार बावर के बास्तील गांव निवासी सेवानिवृत्त निदेशक ने रोशन किया क्षेत्र का नाम

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उत्तराखण्ड: 05 Feb. 2026 मंगलवार को देहरादून/चकराता। जौनसार बावर के सीमांत बास्तील गांव निवासी वरिष्ठ विज्ञानिक डा सरदार सिंह राणा को रेशम अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए पंडित दीनदयाल उपाध्याय रेशम रत्न सम्मान-2026 से नवाजा गया। लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में सरकार ने उन्हें विशिष्ट योगदान के लिए लाइफ एचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया। केंद्रीय रेशम बोर्ड वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार में निदेशक रहे वरिष्ठ विज्ञानिक ने राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान परियोजना में सौ से अधिक शोध पत्र व दस पुस्तकों में लेखन कार्य किया है। सरकार ने उन्हें पुरस्कार के रुप में प्रशस्ति पत्र व पचास हजार की धनराशि प्रदान की। उनकी इस उपलब्धि से उत्साहित स्थानीय लोगों ने कहा यह क्षेत्र के लिए गर्व की बात है।

बावर खत के बास्तील गांव निवासी वरिष्ठ विज्ञानिक डा सरदार सिंह राणा ने 35 वर्षों तक केंद्रीय रेशम बोर्ड वस्त्र मंत्रालय भारत सरकार में अपनी सेवाएं दी। लंबी सेवा के बाद वह 31 जनवरी को निदेशक के पद से सेवानिवृत्त हुए। मंगलवार को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सिल्क एक्सपो-2026 के आयोजन में केंद्रीय रेशम निदेशालय की ओर से सेवानिवृत्त निदेशक डा सरदार सिंह राणा को रेशम अनुसंधान, विकास, प्रसार एवं प्रबंधन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए पंडित दीनदयाल उपाध्याय रेशम रत्न सम्मान एवं लाइफ एचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। सिल्क एक्सपो समारोह में उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री राकेश सचान और केंद्रीय रेशम बोर्ड मंत्रालय के सदस्य सचिव ने उन्हें प्रशस्ति पत्र व पचास हजार पुरस्कार की धनराशि प्रदान की।

केंद्रीय रेशम बोर्ड में प्रधान अन्वेषक एवं निदेशक रहे डा सरदार सिंह ने विभाग में सेवाकाल के दौरान नोडल अधिकारी के रुप में राष्ट्रीय रेशम परियोजना के तहत राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे शहतूत वृक्षारोपण को बढ़ावा देने, रेशम कीट में ग्रेसरी बीमारी की रोकथाम को विज्ञानिक तकनीक विकसित करने, जनित रेशम कीट बीज का उत्तर भारत में प्रशिक्षण एवं कीट पालन, उन्नत रेशम कीट बीज एवं तकनीकियों का मूल्यांकन, आईआईटी रुड़की के साथ संयुक्त अनुसंधान परियोजना के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उज्बेकिस्तान, ताशकंद, वियतनाम में भारतीय विज्ञानिक दल का प्रतिनिधित्व किया। राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर उन्होंने सौ से अधिक शोध पत्र व दस पुस्तकों में लेखन कार्य से बड़ी उपलब्धि हासिल की। लखनऊ में पुरस्कार मिलने पर क्षेत्र के लोगों ने उन्हें बधाई दी। वह क्षेत्र के पहले व्यक्ति हैं जो केंद्रीय रेशम बोर्ड में निदेशक रहे। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने उनकी इस उपलब्धि पर खुशी जताई।

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