
( संवाददाता- चंद्राराम राजगुरु ) उत्तराखण्ड: 10 अगस्त 2025 रविवार को देहरादून /राजधानी में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव-2025 के चुनाव परिणाम घोषित होने से जिला पंचायत अध्यक्ष की ताजपोशी को लेकर सियासी दलों में घमासान मचा है। बहुमत के आंकड़े की बात करें तो जिपं अध्यक्ष बनाने के लिए 16 सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता है। नंबर के हिसाब से कांग्रेस व भाजपा बहुमत के आंकड़े को अपने बूते अकेले नहीं छू पा रहे। पर्याप्त बहुमत के लिए कांग्रेस को तीन व भाजपा को नौ निर्वाचित जिपं सदस्यों को अपने पाले में लाने के लिए सियासी कसरत जारी है। समर्थन जुटाने को सियासी दलों में जोड़तोड़ की राजनीति एवं रस्साकशी चल रही है। कांग्रेस व भाजपा दोनों दल पर्याप्त समर्थन होने का दावा कर रहे हैं। मगर जिपं अध्यक्ष के चुनाव में निर्दलियों की भूमिका सबसे अहम एवं निर्णायक रहेगी। सभी की नजरें इस पर टिकी है कि नया जिपं अध्यक्ष किसका बनेगा।
इस बार पंचायत चुनाव में देहरादून जनपद से जुड़े छह विकासखंडों में से चकराता, कालसी व विकासनगर ब्लाक में कांग्रेस का प्रदर्शन अच्छा रहा। जबकि भाजपा का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। देहरादून जनपद से जुड़े सभी छह ब्लाक में जिला पंचायत की कुल 30 सीटें निर्धारित है। इनमें तीन-तीन सीटें अनुसूचित जनजाति महिला, अनुसूचित जाति महिला व अन्य पिछड़ा वर्ग महिला के लिए आरक्षित है। इसके अलावा दो-दो सीटें अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति व अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए, छह सीटें महिला सामान्य व नौ सीटें अनारक्षित है। चुनाव परिणाम घोषित होने से चकराता में जिला पंचायत की छह सीटों में पांच पर कांग्रेस समर्थित जिपं सदस्य निर्वाचित हुए। जबकि एक सीट पर निर्दलीय ने जीत दर्ज की। चकराता में भाजपा कोई सीट नहीं जीत पाई।
कालसी की पांच जिपं सीटों में से दो पर कांग्रेस ने कब्जा जमाया और तीन सीटें भाजपा के खाते में आई। विकासनगर में जिपं की सात सीटों में से कांग्रेस ने तीन सीटें जीती और भाजपा को सिर्फ एक सीट से संतोष करना पड़ा। सहसपुर में कांग्रेस व भाजपा के खाते में एक-एक सीट आई। इसके अलावा विकासनगर व सहसपुर में निर्दलियों ने अच्छा प्रदर्शन कर तीन-तीन सीटें व चकराता में एक सीट पर जीत दर्ज की। रायपुर व डोईवाला ब्लाक में निर्दलीयों ने बाजी मारी। जनपद में चुनाव परिणाम की बात करें तो कांग्रेस समर्थित 13 जिपं सदस्य, भाजपा समर्थित सात व दस निर्दलीय जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित हुए हैं। बहुमत का आंकड़ा छूने को नंबर के लिहाज से जिपं अध्यक्ष की ताजपोशी के लिए कांग्रेस को तीन व भाजपा को नौ जिला पंचायत सदस्यों की आवश्यकता है।
निर्दलियों के समर्थन के बिना देहरादून में जिपं अध्यक्ष बनना मुश्किल है। निर्दलियों में अधिकांश कांग्रेस पृष्ठभूमि के बताए जा रहे हैं। इसके चलते कांग्रेस बहुमत के आंकड़े से पार जिपं सदस्यों के समर्थन का दावा कर रही है। वहीं भाजपा भी निर्दलियों के समर्थन का दम भर रही है। नतीजे आने के बाद जिपं अध्यक्ष के लिए अनंतिम आरक्षण जारी होने से कांग्रेस भाजपा सरकार पर हमलावर हो गई। जिपं अध्यक्ष की दौड़ में सबसे आगे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं चकराता से रिकार्ड छह बार के विधायक प्रीतम सिंह के पुत्र अभिषेक सिंह पहली बार बृनाड-बास्तील सीट से जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित हुए हैं।
पंचायत चुनाव से सियासी पारी की शुरूआत करने वाले गजियाटा परिवार की तीसरी पीढ़ी के युवा नेता अभिषेक सिंह की राह में महिला आरक्षण रोड़ा बन गया। कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह ने कहा सत्ताधारी दल के इशारे पर सोची समझी रणनीति एवं साजिश के तहत देहरादून में जिपं अध्यक्ष की सीट महिला के लिए आरक्षित की गई। जबकि इससे पूर्व भी यह सीट महिला के लिए आरक्षित थी। विधायक प्रीतम सिंह ने कहा कांग्रेस के पास पर्याप्त बहुमत के आंकड़े से अधिक जिपं सदस्यों का समर्थन प्राप्त है। इसी डर से भाजपा सरकार ने जान बूझकर आरक्षण व्यवस्था में धांधली की है। सत्ताधारी दल अपनी सुविधा के अनुरूप आरक्षण व्यवस्था को लागू कर संवैधानिक मूल्यों के विपरीत कार्य कर रही है।
संविधान प्रदत्त आरक्षण के अधिकार को भाजपा अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए हथियार बनाकर सत्ता का दुरुपयोग कर रही है। विधायक प्रीतम सिंह ने कहा सत्ता के नशे में चूर भाजपा चाहे जो मर्जी हथकंडे अपना ले पर्याप्त संख्या बल के आधार पर जिला पंचायत अध्यक्ष कांग्रेस का ही बनेगा। वहीं पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मधु चौहान ने भाजपा के पास पर्याप्त बहुमत होने का दावा किया है। मधु ने कहा हरिद्वार को छोड़ राज्य के सभी 12 जनपदों में भाजपा के जिला पंचायत अध्यक्ष बनने जा रहे हैं। पूर्व अध्यक्ष मधु चौहान ने दावा किया कि देहरादून में भाजपा के पास पर्याप्त बहुमत है।
हालांकि कुछ दिन बाद सियासी दलों के दावे की तस्वीर जिपं अध्यक्ष के चुनाव में साफ हो जाएगी। चुनावी समीकरण में कांग्रेस व भाजपा भले ही जीत के दावे कर रहे हैं पर सच्चाई यह कि निर्दलियों के समर्थन के बिना बहुमत के आंकड़े को छूना संभव नहीं है। जिपं अध्यक्ष की ताजपोशी में निर्दलियों की भूमिका निर्णायक रहेगी। इस बार जिपं अध्यक्ष का ताज किसके सिर सजेगा इस जुगत में सियासी दल जोड़तोड़ की राजनीति कर रहे हैं। कांग्रेस व भाजपा के दावे से जिपं अध्यक्ष का चुनाव काफी रोचक बन गया। सभी की नजरें इस पर टिकी है। अब देखना यह होगा कि सियासी ऊंट किस ओर करवट बदलेगा।