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नए साल का जश्न अब हर साल बदलते दौर का रिवाज

न्यूज डेस्क/उत्तराखंड: 31 Dec.2025,बुधवार को देहरादून ।  त्योहार और समारोह.. 31 दिसंबर की शाम ;नव वर्ष की पूर्व संध्या, को पार्टियाँ, संगीत, नृत्य, भोजन और आतिशबाजी के साथ मनाया जाता है । देश में नए साल के स्वागत की तैयारियां पूरे शबाब पर हैं।  2026 नया साल खुशियों और बेहतर भविष्य का संदेश लेकर आए। वर्ष 2025 के अलविदा  होने और 2026 के आगमन को यादगार बनाने के लिए लोग अभी से योजनाएं बना चुके हैं। होटल बुकिंगए ट्रैवल प्लानए पार्टी पैकेज और विंटर कार्निवल की गहमागहमी ने पर्यटन स्थलों को जीवंत कर दिया है।

प्रदेशों  के महानगरों से लेकर पहाड़ी इलाकों तक, हर जगह जश्न का माहौल है। देश भर में 31 दिसंबर 2025 की मध्यरात्रि और 1 जनवरी-2026 मनाने को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जाता है, जिसमें लोग जश्न, आतिशबाजीए पार्टीए नए संकल्प लेने और एक.दूसरे को शुभकामनाएँ देने के साथ.साथए अलग-अलग क्षेत्रों में पारंपरिक हिंदू नववर्ष ;नवसंवत्सर, गुड़ी पड़वा आदि को भी पूरे जोश से मनाते हैं, जो नई शुरुआत, उम्मीद और सकारात्मकता का प्रतीक है। खासतौर पर ठंडे राज्यों की ओर पर्यटकों का रुझान इस बार कुछ ज्यादा ही नजर आ रहा है।

बुधवार को देहरादून / राजधानी स्थित . 31 दिसंबर , नव वर्ष की पूर्व संध्या तथा नव वर्ष के अवसर पर सुरक्षा व्यवस्था के दृष्टिगत पुलिस अधीक्षक नगर के नेतृत्व में पुलिस द्वारा रेलवे स्टेशन, माल, भीड़ भाड़ वाले स्थानों पर बम डिस्पोजल टीम तथा डॉग स्क्वाड के साथ की जा रही चेकिंग

उत्तराखंड , हिमाचल में .शिमला, मनाली, धर्मशाला, डलहौजी, कसौली, जम्मू.कश्मीर,और राजस्थान जैसे पर्यटन स्थल नए साल के जश्न के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं। पर्यटकों का कहना है कि पहाड़ों की ठंड, बर्फबारी का रोमांचए संगीत से सजी रातें और नए साल का पहला सवेरा किसी उत्सव से कम नहीं लगता। यही वजह है कि इस बार बड़ी संख्या में युवा, परिवार और कपल्स पहाड़ी इलाकों का रुख कर रहे हैं। मौसम का मिजाज भी इस समय पर्यटन के अनुकूल बना हुआ है।

देश के कई हिस्सों में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। वहीं पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी ने सैलानियों का उत्साह और बढ़ा दिया है। बर्फ से ढके पहाड़, देवदार के जंगल और ठंडी हवाओं के बीच नए साल का स्वागत करना लोगों के लिए खास अनुभव बन रहा है। यही वजह है कि हिमालयी प्रदेशों में नए साल के जश्न का माहौल सबसे ज्यादा नजर आ रहा है।यह दिन नए साल के लिए बुरी आदतें छोड़ने,या कोई नया कौशल सीखने जैसे वादे करने, करने का होता है। नए साल के स्वागत की तैयारियां रंग.बिरंगी रोशनी, स्थानीय संस्कृति की झलक, लोकनृत्य, संगीत कार्यक्रम और पारंपरिक व्यंजन इन आयोजनों की खास पहचान बन चुके हैं। नए साल का जश्न अब हर साल बदलते दौर का रिवाज बनता जा रहा है। पहले जहां लोग अपने शहरों में ही सीमित दायरे में नया साल मनाते थेए वहीं अब ट्रैवल और टूरिज्म नए साल के उत्सव का अहम हिस्सा बन चुका है।

खासतौर पर ठंडे प्रदेशों में 30 और 31 दिसंबर – 2025  की बुकिंग पहले से शुरू हो जाती है। नए साल का इंतजार कर रहे पर्यटक सिर्फ पार्टी ही नहीं, बल्कि सुकून और यादगार पलों की तलाश में भी हैं। पहाड़ों की शांति, ठंडी सुबह की धूप, स्थानीय लोगों की मेहमाननवाजी और प्रकृति के करीब बिताए गए पल उन्हें साल भर की भागदौड़ से राहत देते हैं। यही कारण है कि नए साल का जश्न अब केवल एक रात का उत्सव नहीं रह गया! बल्कि यह कुछ दिनों की छुट्टियों और अनुभवों का संगम बन चुका है।  कुल मिलाकरए देशभर में नए साल के स्वागत को लेकर जबरदस्त उत्साह है। पहाड़ी राज्यों में पर्यटकों की बढ़ती भीड़, होटल और ट्रांसपोर्ट की फुल बुकिंग और विंटर कार्निवल की रंगीन तैयारियां इस बात का संकेत हैं कि 2026 का आगमन पूरे उल्लास और उमंग के साथ किया जा रहा है। प्रदेशों में जश्न जरूर मनाया जा रहा है।

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