
न्यूज डेस्क / उत्तराखंड: 07 Nov. 2026, देहरादून। दिवाली पर सद्भावना की ऐसी खुराक उत्तराखंड के डिप्टी ड्रग्स कंट्रोलर का दफ्तर बना गोदाम, कमरे गिफ्ट्स से पटे, कर्मचारियों के हाथ खाली! सूत्रो के हवाले से प्राप्त एक विशेष रिपोर्ट-इस दिपावाली के मौके पर सूत्रो ने दी जानकारी में त्योहारों के मौसम में जहां आम जनता मिठाइयों और खुशियों का लेन-देन करती है, वहीं स्वास्थ्य विभाग के गलियारों में ड्रग्स लाइसेंस और दवा एवं खद्याय पदार्थो की सैंपलिंग की मेहरबानियों का नजारा ही कुछ और देखने को मिला। खबर है कि जिले के डिप्टी ड्रग्स कंट्रोलर साहब के कार्यालय में इस दिवाली इतनी सद्भावना बरसी कि कार्यालय के कमरे उपहारों से ठसाठस भर गए।
सूत्रों के मुताबिक, इस महा-उपहार पर्व में किसी की निष्ठा कम नहीं रही,
दवा फैक्ट्री मालिक जिन्होंने सैंपलिंग और ड्रग्स लाइसेंस नवीनीकरण की सुचारू व्यवस्था के लिए बड़े-बड़े डिब्बे भिजवाए। होलसेल दवा विक्रेता जिन्होंने बिना रुकावट माल की आपूर्ति और कागजी खानापूर्ति से बचने के लिए शुभकामनाएं पहुंचाईं।
ड्रग्स के नए लाइसेंस आवेदकर जिनकी फाइलें महीनों से टेबल दर टेबल घूम रही थीं, उन्होंने फाइलों में श्गतिश् लाने की उम्मीद में तोफे भिजवाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
साथ ही उत्तराखण्ड में खाद्य एवं औषधि व्यापारी जो अपनी दुकानदारी को जांच की आंच से सुरक्षित रखने के लिए अग्रिम दिवाली मना गए। देखते ही देखते ििडप्टी ड्रग्स कंट्रोलर साहब के दफ्तर का कोना-कोना गिफ्ट पैक्स, ड्राई फ्रूट्स, क्रॉकरी और न जाने किन-किन कीमती सौगातों से पट गया। दफ्तर अचानक किसी सुपरमार्केट का गोदाम जैसा नजर आने लगा।
सूत्रो ने यह भी बाताया कि कर्मचारियों के हिस्से आई सिर्फ कंजूसी- असली कहानी तो इसके बाद शुरू हुई। दफ्तर के जिन छोटे कर्मचारियों, चपरासियों और क्लर्कों ने दिन-रात एक करके इन गिफ्ट्स की अनलोडिंग करवाई और कमरों में सेट किया, उन्हें उम्मीद थी कि साहब का दिल त्योहार पर बड़ा होगा।
लेकिन, साहब ने यहां भी अपना नियंत्रण (कंट्रोल) पूरी तरह बनाए रखा! कार्यलय के कमरे व अन्य जगहो पर भेजवा कर उपहारो से भरकर आए गिफ्ट्स में से कर्मचारियों को देने में ऐसी कंजूसी दिखाई गई कि निचले अमले में फुसफुसाहट और भारी नाराजगी फैल गई है। दफ्तर में चर्चा है कि जो साहब दूसरों पर श्मानकों और गुणवत्ताश् का नियम लागू करते हैं, वे दिवाली के बंटवारे में श्न्याय के मानकश् ही भूल गए। अब आलम यह है कि दफ्तर के बाहर तो सदाचार के बोर्ड टंगे हैं, लेकिन अंदर का नजारा किसी श्फेवर बैंकश् से कम नजर नहीं आ रहा।
बड़ा सवाल-क्या ये गिफ्ट सिर्फ दिवाली की शुभकामनाएं थे या किसी आने वाली श्ढीलश् और श्मेहरबानीश् की एडवांस किश्त? और क्या विभाग के आला अधिकारी इस बात का संज्ञान लेंगे कि एक सरकारी दफ्तर त्योहार के नाम पर उपहारों का गोडाउन कैसे बन गया?
इस खबर हम पुष्टि नही करते यह सूत्रो के हवाले से प्राप्त हुई है।



