उत्तराखंडदेहरादूनशासन-प्रशासन

“भारत: विश्व गुरु की राह पर—दून में नीति, तकनीक और जनभागीदारी पर मंथन”

Spread the love
उत्तराखण्ड: 28 MARCH.2026, शनिवार को देहरादून/राजधानी स्थित ऑडिटोरियम, सर्वे चौक में दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र, चिंतन रिसर्च फाउंडेशन तथा Indian Institute of Public Administration के  तत्वावधान में “भारत: विश्व गुरु की राह पर” विषय पर एक उच्चस्तरीय विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्धन द्वारा की गई। कार्यक्रम का संचालन दून पुस्तकालय के निदेशक एन. रविशंकर ने किया। इस अवसर पर Smarter than the Storm (लेखक: Amitabh Kant) पुस्तक का विमोचन भी किया गया।

पूर्व सीईओ, नीति आयोग एवं G-20 शेरपा अमिताभ कांत ने भारत की उभरती वैश्विक भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने तकनीक, कनेक्टिविटी, नीतिगत सुधार, वर्क कल्चर एवं सामाजिक परिवर्तन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है।

उन्होंने डेमोग्राफिक डिविडेंड को अवसर में बदलने, स्किल एवं R&D गैप को दूर करने तथा गुणवत्तापूर्ण अवसंरचना के विकास पर बल दिया।“Zero Defect, Zero Effect” को उत्पादन संस्कृति में आत्मसात करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि भारत को वैश्विक वैल्यू चेन में उच्च स्थान प्राप्त करने हेतु निरंतर सुधार और नवाचार को अपनाना होगा।

विश्व व्यापार संगठन (WTO) के पूर्व निदेशक शिशिर प्रियदर्शी ने कहा कि भारत को ‘विश्व गुरु’ बनने के दावे से अधिक उस दिशा में निरंतर प्रयास और आत्मचिंतन पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने भारत की प्राचीन वैश्विक नेतृत्व की विरासत को प्रेरणा बताते हुए वैश्विक प्रतिस्पर्धा में गुणवत्ता, विश्वसनीयता और सकारात्मक सोच को प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई। उनका दृष्टिकोण भारत के सॉफ्ट पावर एवं नैतिक नेतृत्व को सुदृढ़ करने पर केंद्रित रहा।

मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने कहा कि उत्तराखंड की ग्रीन इकोनॉमी, विशिष्ट आतिथ्य, युवाओं की जिम्मेदार भागीदारी एवं जनचेतना, भारत को विश्व गुरु बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि “जनभागीदारी के बिना विकास अधूरा है” तथा पर्यटन, हेल्थ एवं वेलनेस और पर्यावरणीय संतुलन को राज्य के विकास के प्रमुख आधार बताया।

भारत सरकार के पूर्व वाणिज्य सचिव एवं प्रतिस्पर्धा अपीलीय न्यायाधिकरण के सदस्य राजीव खेर ने वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की सुदृढ़ रणनीतिक क्षमता पर प्रकाश डाला। उन्होंने गुणवत्ता-आधारित प्रतिस्पर्धा एवं वैल्यू चेन संतुलन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा—“जो गुणवत्ता सुनिश्चित करेगा, वही वैश्विक मंच पर टिकेगा।”

पूर्व शहरी विकास सचिव भारत सरकार शंकर अग्रवाल ने शहरों को आर्थिक विकास के केंद्र (इकोनॉमिक हब) के रूप में विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने तकनीक-आधारित विकास मॉडल अपनाने, शहरी प्रबंधन, जल आपूर्ति, स्वास्थ्य एवं शिक्षा में सुधार तथा ग्रामीण-शहरी माइग्रेशन को संतुलित करने हेतु स्मार्ट अर्बन प्लानिंग की आवश्यकता बताई।

वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि विश्व गुरु अपने आप में एक अतिशयोक्ति है और विश्व गुरु से तात्पर्य विश्व कोच से अधिक जोड़ा जाना चाहिए।  “विश्व गुरु” बनने की दिशा में भारत को निरंतर सुधार, नवाचार, गुणवत्ता एवं जनभागीदारी के मार्ग पर आगे बढ़ना होगा। इस दौरान बड़ी संख्या में सेवानिवृत्ति वरिष्ठ ब्यूरोक्रेट्स सहित बड़ी संख्या में जनमानस उपस्थित था।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button