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मान्यता कार्ड खत्म, विज्ञापन अटके, चार साल से सूचीबद्धता लंबित-सूचना सूचना विभाग की लापरवाही से उठे बड़े सवाल

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उत्तराखंड: 07 FEB.2026, शनिवार को देहरादून । प्राप्त जानकारी के अनुसार  सूचना एवं लोक संपर्क विभाग,उत्तराखंड की कार्यप्रणाली को लेकर प्रदेश के पत्रकारों और साप्ताहिक समाचार पत्रों के प्रकाशकों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। विभाग में पिछले कई महीनों से गंभीर लापरवाही सामने आ रही है, जिससे पत्रकारों और छोटे समाचार पत्रों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

जानकारी के अनुसार साप्ताहिक समाचार पत्रों की सूचीबद्धता के लिए कई प्रकाशक पिछले चार वर्षों से इंतजार कर रहे हैं। वहीं वर्ष 2025 के अक्टूबर माह में प्रिंट मीडिया सूचीबद्धता समिति का गठन किया गया था, जिसमें विभिन्न पत्रकार संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया था। उस समय उम्मीद जताई गई थी कि समिति के गठन के बाद वर्षों से लंबित सूचीबद्धता प्रक्रिया को गति मिलेगी, लेकिन हैरानी की बात यह है कि लगभग छह माह बीत जाने के बाद भी मार्च 2026 तक समिति की पहली बैठक तक आयोजित नहीं की गई है।

इसी तरह सजावटी विज्ञापनों के लिए विभिन्न समाचार पत्रों द्वारा भेजे गए प्रस्ताव भी विभागीय फाइलों में पिछले चार माह से अधिक समय से लंबित पड़े हैं और अब तक उनके लिए विज्ञापन आदेश (आरओ) जारी नहीं किए गए हैं। इससे छोटे और मध्यम श्रेणी के समाचार पत्रों की आर्थिक स्थिति भी प्रभावित हो रही है।

वहीं सोशल मीडिया और न्यूज़ पोर्टल से जुड़े मामलों में भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। न्यूज़ पोर्टल के लिए निकाले गए टेंडरों को लगभग आठ माह बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक उनके टेंडर खोले तक नहीं गए हैं। इसके कारण डिजिटल मीडिया से जुड़े पत्रकार भी विभाग की कार्यप्रणाली से परेशान हैं।

पत्रकारों के मान्यता कार्डों की बात करें तो राज्य स्तर और जिला स्तर के मान्यता कार्डों की अवधि 31 जनवरी 2026 को समाप्त हो चुकी है। फरवरी माह भी गुजर गया और मार्च शुरू हो चुका है, लेकिन अभी तक मान्यता कार्डों का नवीनीकरण नहीं किया गया है। बताया जा रहा है कि एलआईयू रिपोर्ट के आधार पर नवीनीकरण किया जाएगा, लेकिन एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी पत्रकारों को नए कार्ड प्राप्त नहीं हुए हैं।

इसके अलावा समाचार पत्रों के विज्ञापन बिलों के भुगतान के लिए भी सैकड़ों समाचार पत्र विभाग के चक्कर काट रहे हैं। विभाग की ओर से बजट का हवाला दिया जा रहा है, ऐसे में यह देखना बाकी है कि मार्च माह तक इन लंबित भुगतान का समाधान हो पाता है या नहीं।

इस दौरान पत्रकार संगठनों के नेता और साप्ताहिक समाचार पत्रों के प्रकाशक लगातार सूचना एवं लोक संपर्क विभाग के अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कोई भी अधिकारी स्पष्ट जवाब देने को तैयार नहीं है। इससे पत्रकारों में भारी नाराजगी और असंतोष का माहौल बना हुआ है।

इस दौरान आईसना (ऑल इंडिया स्मॉल न्यूजपेपर्स एसोसिएशन) उत्तराखण्ड इकाई ने भी इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए पत्रकार हितों की रक्षा के लिए आवाज उठाई है। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि शीघ्र ही सूचीबद्धता, विज्ञापन आदेश, बिल भुगतान और मान्यता नवीनीकरण की लंबित प्रक्रियाओं का समाधान नहीं किया गया तो संगठन पत्रकारों के हित में आंदोलन की रणनीति बनाने को बाध्य होगा।

इस स्थिति को लेकर अब सूचना महानिदेशक की कार्यशैली पर भी पत्रकार सवाल उठा रहे हैं। पत्रकारों ने सरकार से मांग की है कि मामले का तत्काल संज्ञान लेते हुए विभागीय कार्यप्रणाली में सुधार किया जाए और सूचीबद्धता, विज्ञापन तथा मान्यता नवीनीकरण से जुड़े सभी लंबित मामलों का शीघ्र समाधान किया जाए, ताकि पत्रकारों को अनावश्यक परेशानियों से राहत मिल सके।

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