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बुरांश: पहाड़ों की परंपरा और जीवनशैली से जुड़ा हुआ अनमोल उपहार

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न्यूज डेस्क / उत्तराखंड: 01 FEB.2026, रविवारको देहरादून ।  उत्तराखंड का राज्य पुष्प : बुरांश (Rhododendron) उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता का प्रतीक बुरांश केवल एक फूल नहीं, बल्कि पहाड़ों की संस्कृति, परंपरा और जीवनशैली से जुड़ा हुआ अनमोल उपहार है। बुरांश को उत्तराखंड का राज्य पुष्प घोषित किया गया है। यह फूल हिमालयी क्षेत्रों की पहचान और गौरव माना जाता है। उत्तराखंड का राज्य पुष्प बुरांश वास्तव में हिमालय की आत्मा है।

बुरांश का परिचय-बुरांश का वैज्ञानिक नाम Rhododendron arboreum है। यह मुख्यतः उत्तराखंड के मध्यम और ऊँचे पर्वतीय क्षेत्रों में पाया जाता है। मार्च से मई के बीच जब पहाड़ों में बुरांश खिलता है, तो पूरा वातावरण लाल रंग की छटा से सज उठता है। इसकी सुंदरता पर्यटकों को भी आकर्षित करती है।

प्राकृतिक और सांस्कृतिक महत्व-बुरांश केवल प्रकृति की शोभा नहीं बढ़ाता, बल्कि पहाड़ी जीवन में इसका विशेष स्थान है। स्थानीय लोग इसे पर्वतीय संस्कृति का प्रतीक मानते हैं। बुरांश के फूलों से बने रस और शरबत पारंपरिक रूप से घर-घर में उपयोग किए जाते हैं।

औषधीय गुण-बुरांश के फूलों में अनेक औषधीय गुण पाए जाते हैं। इसके रस को—

  • हृदय रोगों के लिए लाभकारी

  • गर्मियों में शरीर को ठंडक देने वाला

  • थकान और तनाव कम करने वाला

माना जाता है। इसके अलावा यह प्राकृतिक ऊर्जा प्रदान करता है।

आर्थिक उपयोग-आज बुरांश के शरबत और उत्पादों की मांग बढ़ रही है। इससे पहाड़ी क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर भी विकसित हो रहे हैं। कई स्वयं सहायता समूह और स्थानीय संस्थाएं बुरांश के जूस, जैम और स्क्वैश बनाकर बाजार में बेच रही हैं।

संरक्षण की आवश्यकता-बुरांश के जंगल पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में सहायक हैं। लेकिन अत्यधिक कटाई और जंगलों की कमी के कारण इसके संरक्षण की आवश्यकता बढ़ गई है। हमें इस प्राकृतिक धरोहर को बचाने के लिए जागरूक होना होगा।

निष्कर्ष-बुरांश उत्तराखंड की पहचान, प्रकृति का अनमोल उपहार और संस्कृति का जीवंत प्रतीक है। यह फूल न केवल सुंदरता का प्रतीक है, बल्कि स्वास्थ्य, रोजगार और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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