
उत्तराखंड::21 अगस्त 2025, देहरादून / राजधानी स्थित प्राप्त जानकारी के मुताबिक जिला अस्पताल पं0 दीनदयाल उपाध्यय चिकित्सालय कोरोनेशन देहरादून की ईकाइ गांधी शताब्दी नेत्र चिकित्सालय (प्रीतम रोड), देहरादून में गांधी अस्पताल की ओ.पी.डी. पंजीकरण के लिए मरीज रोज आना करीब 200 से 250 आते हैं। वही जिसमें इस अस्पताल में चर्म रोग , नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर फिजियोथैरेपिस्ट, मनोचिकित्सा विभाग, डिस्पेंसरी एवं पैथोलॉजी लैब विभाग संचालित हो रहे हैं। जिसमें कुल मिलाकर देखा जाए तो 30 से 35 की संख्या में स्टाफ कार्य कर रहा है।
वही, इस अस्पताल की हालत देखकर हम हैरान रह गए जब हमारे संवाददाता को किसी तिमारदार व कर्मी ने बताया कि इस गांधी अस्पताल में शौचालय में ठीक ढंग से साफ सफाई नहीं कि जाती है। दूसरे यहां वांशरूम में हाथ धोने के लिए वाश बेसिन में साबुन की कोई व्यवस्था नहीं है। और यहां साफ-सफाई भी सुचारू रूप से नही होती है। साथ सफाई कर्मी सुबह शौचालया की एक बार सफाई करके दोबारा नजर नहीं आता। साथ ही पीने के पानी को भ्भी स्टॉफ तरस रहे है।
इस पीने के पानी को लेकर इसकी जानकारी मिली तो पता चला पुरे गांधी चिकित्सालय में एक ही वाटर कूलर पीने के पानी के लिए अस्पताल परिसर के बाहर पार्किंग में लगा हुआ है। यहां पर आने वाले केवल मरीज एवं उसके तीमारदार ही पानी पीते हैं, वही हाथ धोते हैं एवं कुल्ला और थूकते हैं। जिस कारण इस अस्पताल का पूरा स्टाफ अपना पानी साथ लेकर आता है। सीमित पानी लाने के कारण इस पूरी गर्मी में स्टाफ को प्रयास से गला सूखा रहकर काम करना पड़ता है। क्योंकि यह और कोई पीने के पानी की व्यवस्था नही है।
साथ ही इस जिला अस्पताल के गांधी नेत्र चिकित्सालय में स्टाफ के लिए कोई अलग से पीने के पानी एवं वॉशरूम एवं वॉश बेसिन हाथ धोने की कोई सुविधा नहीं है। इस अस्पताल के कुछ स्टाफ का दबी जुबान में कहना है कि पूरी गर्मी का सीजन निकल गया यह ठंडे पानी पीने को तरस गए। हम अपना पानी साथ लेकर आते हैं। वहा भी पूरा नहीं पड़ता एवं हमें काम के बाद मरीज को देखने के बाद के बाद हाथ धोना पड़ता है तो उसके लिए वॉश बेसिन भी अलग से व्यवस्था कही नहीं है। ना हीं वॉश बेसिन के लिए कोई साबुन उपलब्ध है। वही दुसरी ओर देहरादून के डीएम महोदय जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाएं पर विशेष ध्यान तो दे रहे है, लेकिन यह इस अस्पताल का प्रबंधन गहन निद्रा में सोया हुआ है।
साथ ही इस गांधी शताब्दी के प्रवेश द्वार पर एक चायव खाने पीने के लिए कैंटीन के नाम से खोका संचालित हो रहा है । वह भी पीएमएस एवं अस्पताल प्रबंधन की बिना परमिशन से चाय व खान पान का धंधा चल रहा है। हैरानी वाली बात यह है कि इस अस्पताल के अंदर ओपीडी व किसी भी डॉक्टर व विभाग के आस पास कोई पीने के पानी व शौचालय/वॉशरूम आदि अन्य सुविधाएं नही है। वही , इस आस्पताल के बहार सर्वजानिक पानी पीने के लिए दो कुलर रखे जिसमें एक खराब है। कहा है इस अस्प्ताल को पीआरओ सहाब?
जबकि हाल ही में देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल ने गांधी शताब्दी चिकित्सालय में राज्य के प्रथम आधुनिक जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र का निरीक्षण कर यह दिव्यांग पुनर्वास केंद्र सुव्यवस्थित एवं आधुनिक सुविधाओं से युक्त तैयार किया गया जिसमें दिव्यांगजन हेतु सभी सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। वही डीएम द्वारा दिव्यांग पुनर्वास केंद्र का जल्द ही लोकार्पण किया गया था।