
न्यूज डेस्क/उत्तराखंड: 09 अगस्त 2025,शनिवार को देहरादून । मीडिया रिपोर्ट के अनुसार राहुल गांधी कह रहा है देश् की वोटर लिस्ट में गड़बड़ है। हम भी कह रहे है, गड़बड़ है , बंगाल से ले कर गोरखोर तक बॉर्डर एरिया में खूब फर्जी वोट बने है। ओर चुनाव आयोग ने भी बिहार में SIR कर ये साबित किया है की गड़बड़ तो है। इसीलिए 65 लाख वोट काटे गए है। मगर ये आरोप बिल्कुले ही हास्यास्पद है की EC मोदी को चुनाव जिताने के लिए गड़बड़ कर रहा है। या जमानती का ये कहना कि मोदी के खिलाफ एंटी एंकम्बेंसी नही है। या ये कहना कि वोट चोरी कर के चुनाव जीत रहा है। मोदी ये हास्यास्पद तो है ही साथ ही कांग्रेस गांधी परिवार की राजनीतिक समझ पर सवाल खड़े कर रही है ।
ओर जब चुनाव आयोग ने कहा कि आप जो कह रहे है उसका हलफनामा दीजिए ताकि आपके आरोप गलत हो तो आप पर कानूनी कार्यवाही करने का आधार हो। ओर जवाब में राहुल गांधी का ये कहना कि मै सांसद हु, ओर मैने संविधान की शपथ ली है, मै झूठ कैसे बोल सकता हु , ये बात पूरे मामले को ही संदेहास्पद बना देती है । क्योंकि राहुल गांधी आज तक बहुत से झूठ बोले है ओर जिसके लिए कोर्ट में माफी भी मांग चुके है तो अब न तो जनता और न ही देश का सिस्टम आप पर भरोसा करता है । इसलिए आरोप सच्चे है तो हलफनामा दे दीजिए , हलफनामा देने से मुकरना ही आपको झूठा साबित करने के लिए काफी है। और रही वोटर लिस्ट की गड़बड़ी की बात तो उसके लिए चुनाव आयोग पहले से ही पूरे देश की SIR का ओलं लिए बैठा है जिसकी शुरुआत बिहार से हो भी चुकी है ।
एक तरफ आप गड़बड़ी की बात करते हो और दूसरी तरफ SIR के विरोध में संसद ठप्प करते हो
जनता सब समझ रही है की असली दिक्कत कहा और किसे है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक बिहार SIR के मुद्दे पर दस दिन से संसद ठप्प कर रखी है विपक्ष ने मगर चुनाव आयोग नई बोटर लिस्ट जारी कर 15 दिन से इंतजार कर रहा है आपत्तियों के लिए आज तक किसी भी राजनीतिक दल ने एक भी आपत्ति दर्ज नही कराई है।
क्यो है ना पागल पंती असल मे ये सब विपक्ष के नेता बिना सत्ता के सड़क नापते नापते सड़क छाप हो गए है। जिनके पास अब न नियत बची है न मुद्दे और न क्रेडिबिलिटी बची है न ही जनता का भरोसा बचा है।
जानकारी के मुताबिक ईवीएम की बेटरी 100% वाली कहानी कहा गई।, ईवीएम का तो नाम लेना ही बंद कर दिया। क्यों ,क्योंकि वह थ्योरी चली नहीं इसलिए अब झूठ की एक नयी और थ्योरी लेकर आए हैं जनता के बीच पहले राहुल बाबा और उनकी कांग्रेस पार्टी को यह तय कर लेना चाहिए कि आखिर उन्हें किस धोखे की थ्योरी पर टिकना है। कभी कहते हैं — “बीजेपी EVM में हेराफेरी करती है.”, तो कभी चिल्लाते हैं — “बीजेपी ने वोटर फ्रॉड किया!”
अब ज़रा कॉमन सेंस लगाइए — अगर कोई EVM ही कंट्रोल कर ले, तो उसे वोटर लिस्ट में धांधली करने की ज़रूरत क्यों पड़ेगी? या फिर राहुल बाबा के विज्ञान में दोनों काम साथ-साथ चलते हैं — ताकि सुरक्षा की डबल लेयर बनी रहे!
असल में, कांग्रेस की राजनीति अब तथ्यों से नहीं, तुकबंदियों से चल रही है. हार हो तो EVM दोषी, हार बड़ी हो तो मतदाता सूची भी दोषी. जीत अगर कभी हो जाए (जो अब दुर्लभ ही है) — तो कहते हैं, “जनता ने लोकतंत्र बचा लिया।.”
राहुल बाबा के प्रेस कॉन्फ्रेंस अब कॉमेडी स्पेशल लगने लगे हैं — पहले आरोप, फिर फोटो, फिर बिना सबूत के लंबा-चौड़ा भाषण, और अंत में वही पुराना राग — “लोकतंत्र खतरे में है.”।
अगर सच में इतने सबूत हैं, तो कानून के मुताबिक हलफ़नामा भरकर अदालत में पेश करें, वरना ये रोज़-रोज़ का “फ्रॉड दर्शन” सिर्फ़ एक बात साबित करता है — कांग्रेस की असली समस्या EVM नहीं, बल्कि उनकी अपनी सोच का ‘शॉर्ट सर्किट’ है.।