
उत्तराखंड: 10-Oct. 2026, देहरादून / राजधानी स्थित कलेक्ट्रेट परिसर में देहरादून, जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की अध्यक्षता में पीसीपीएनडीटी जिला सलाहकार समिति की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक के दौरान जनपद में पीसीपीएनडीटी अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन और लिंगानुपात में सुधार को लेकर गंभीर मंथन किया गया।
साथ ही देहरादून डीएम डॉ. आशीष चौहान ने कम लिंगानुपात वाले गांवों को चिह्नित कर रेड जोन बनाने, अल्ट्रासाउंड केंद्रों की नियमित निगरानी करने तथा भ्रूण के लिंग की जांच कराने और करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
दून जनपद के कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित पीसीपीएनडीटी जिला सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी ने जनपद में लिंगानुपात की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचएमआईएस) के वर्ष 2025-26 के आंकड़ों में उत्तराखंड का लिंगानुपात 939 के मुकाबले देहरादून का लिंगानुपात 927 पाए जाने पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि प्रत्येक गांव के पिछले पांच वर्षों के लिंगानुपात संबंधी आंकड़ों का गहन विश्लेषण किया जाए और असामान्य स्थिति वाले क्षेत्रों की पहचान कर विशेष निगरानी सुनिश्चित की जाए।
देहरादून डीएम ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को जनपद के सभी 218 क्रियाशील डायग्नोस्टिक एवं इमेजिंग केंद्रों का नियमित निरीक्षण करने तथा गर्भवती महिलाओं की प्रभावी ट्रैकिंग के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कन्या भ्रूण के लिंग की जांच कराने या करने वालों के विरुद्ध अधिनियम के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
सीएमओ ने बताया कि इस वर्ष जिले के लिंगानुपात 927 से बढ़कर 937 हुआ है। जनपद में सबसे कम लिंगानुपात डोईवाला व कालसी में दर्ज किया गया है। वर्ष 2026-27 के आंकड़ों के अनुसार डोईवाला में 885, सहसपुर में 924, रायपुर में 949, कालसी में 887, विकासनगर में 1000 तथा चकराता में 1060 लिंगानुपात दर्ज किया गया है।
इस दौरान बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) केके मिश्रा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज कुमार शर्मा, पीसीपीएनडीटी के जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. बिमलेश जोशी, जिला कार्यक्रम अधिकारी जितेन्द्र कुमार, जिला चिकित्सालय के वरिष्ठ पैथोलॉजिस्ट, वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ, वरिष्ठ रेडियोलॉजिस्ट, जिला शासकीय अधिवक्ता सहित समिति के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।



