
उत्तराखंड: 08 Oct. 2026, देहरादून / राजधानी स्थित उत्तराखंड के सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थानों में शुमार राजकीय दून मेडिकल कॉलेज,देहरादून एक बार फिर सुर्खियों में है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार सुर्खियां किसी एक मामले तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विवादों और सवालों की पूरी फेहरिस्त दिखाई दे रही है। इस मेडिकल अस्पताल में कहने को कई पीआरओ व वार्ड ब्वाय तैनात है लेकिन जरूयरत पर मरीजो को नही मिल पाती इनकी सेवाएं। ये पीआरओ व वार्ड ब्वाय पीआईपी व नेताओ एवं अधिकारीयों की आवभगत में व्यस्थ रहते है।
जानकारी के मुताबिक इस राजकीय दून मेडिकल कालेज देहरादून में ऐवही जिसमें इस दून अस्पताल की इमरजेंसी में कई बार तीमारदारों और ईएमओ डॉक्टरो व सुरक्षाकर्मियों के बीच विवाद के बाद जमकर मारपीट की खबरे भी खूब उजागर हुईंसा क्या हो रहा है कि छोटी से छोटी अव्यवस्था भी अब बड़ी खबर बनकर बाहर आ रही है? दरअसल, दून मेडिकल कॉलेज में अव्यवस्थाओं का इतिहास कोई नया नहीं है। क्या वास्तव में व्यवस्था पहले से ज्यादा खराब हुई है या फिर अब दून मेडिकल कॉलेज के भीतर की हर छोटी-बड़ी बात बाहर तक पहुंचाने का कोई नया तंत्र सक्रिय हो गया है? और यहीं से कहानी का सबसे दिलचस्प सवाल सामने आता है।
—क्या यह सिर्फ बदहाल व्यवस्था की तस्वीर है या फिर किसी बड़ी कुर्सी की लड़ाई का साइड इफेक्ट? क्रम में ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि व्यवस्थाओं से जुड़ी शिकायतों को लगातार उछाले जाने की चर्चा है।इसी क्रम में राजकीय दून मेडिकल कालेज में एमबीबीएस छात्रों की मेस फीस में हुए फर्जीवाड़े के मामले खूब चर्चा में है। सूत्रों के अनुसार अधिकारियों की लापरवाही से करीब 80 लाख रुपये का मेस घोटाला होने की बात सामने आई है। जांच में कई स्तरों पर गंभीर अनियमितताएं और लापरवाही सामने आई ।
वही दुसरी ओर जानकारी में दून अस्पताल में बड़ा दवा फर्जीवाड़ा सामने आया है। डॉक्टर मरीजों को अस्पताल की फार्मेसी में दवाएं उपलब्ध होने के बावजूद बाहर के निजी स्टोर से खरीदने को कह रहे।आया कि जिन दवाओं के बिल मरीजों ने बाहर की दुकानों से खरीदकर लगाए थे, ठीक उसी दौरान वे दवाएं अस्पताल की सरकारी फार्मेसी के स्टॉक में पर्याप्त मात्रा में दर्ज थीं. यानी, जो दवाएं मरीजों को मुफ्त मिलनी चाहिए थीं, उनके लिए उन्हें बेवजह अपनी जेब ढीली करनी पड़ी।
दून मेडिकल कालेज अस्पताल में अब दवाओं के स्टाक की जानकारी रजिस्टर और अनुमान के भरोसे नहीं रहेगी। अस्पताल की मेडिसिन फार्मेसी को कंप्यूटरीकृत करने की तैयारी शुरू है।नई व्यवस्था में किस दवा की कितनी मात्रा उपलब्ध है, किस विभाग को कितनी जरूरत है और कौन सी दवा एक्सपायर होने वाली है, इसकी जानकारी हर समय आनलाइन उपलब्ध रहेगी।
जानकारी के मुताबिक कभी रैगिंग, कभी मेस से जुड़ी शिकायतें, कभी प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर सवाल तो कभी मेडिकल शिक्षा और दाखिले से जुड़े विवाद—दून मेडिकल कॉलेज का नाम लगातार खबरों में बना हुआ है?



