
उत्तराखंड: 06 AUG. 2026, गुरुवार को देहरादून / राजधानी स्थित उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेठी, में प्राप्त जानकारी के मुताबिक लंबे इंतजार के बाद कांग्रेस ने प्रदेश कार्यकारिणी घोषित कर दी है। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल की टीम में 24 उपाध्यक्ष, 36 महासचिव और 107 सचिव बनाए गए हैं।
इस दौरान कांग्रेस पार्टी के हरीश रावत समेत 41 वरिष्ठ नेताओं को कार्यकारी समिति में शामिल किया गया है। गुरुवार देर रात राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कार्यकारिणी की घोषणा की। पिछले साल नवंबर में गोदियाल के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में कमान संभालने के बाद से कार्यकारिणी का इंतजार हो रहा था। कोषाध्यक्ष की अहम जिम्मेदारी गोदावरी थापली को दी गई है।
साथ ही उत्तराखण्ड कांग्रेस पार्टी में 36 महासचिव पार्टी में राजेन्द्र भंडारी, नवीन जोशी, अभिषेक सिंह, विजय गुंसोला, तेलू राम, पुष्कर जैन, राकेश लाल शाह, दीप शर्मा, मकबूल कुरैशी, अमरजीत सिंह, याकूब सिद्दीकी, राजेन्द्र शाह, जसवंत सिंह चौहान, सुमित्तर भुल्लर, अनीता शर्मा, जयेन्द्र रमोला, संजय किरोला, राजेन्द्र टंगड़िया, गौरव चौधरी, डॉ. गणेश उपाध्याय, वीरेन्द्र पोखरियाल, नीरज त्यागी, राकेश सिंह राणा, इशिता, विनोद चौहान, राकेश राजपूत, राव शेर मोहम्मद, राकेश नेगी, अरविन्द प्रधान, शोभा बिष्ट, दीपा आर्या, अनिल भास्कर, अश्वनी बहुगुणा, नरेंद्र राणा, डॉ. सोनिया आनंद, संदीप चीमा महासचिव बनाया गया है।
साथ ही रवि टम्टा का कहना है कि इस तकनीक का उद्देश्य पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा को तेज और आसान बनाना है। उनके मुताबिक, जिस दूरी को सड़क मार्ग से तय करने में करीब 40 मिनट लगते हैं, वही दूरी उनके फ्लाइंग व्हीकल से महज 12 मिनट में पूरी की जा सकती है। उन्होंने बताया कि परीक्षण के दौरान मिले परिणाम उनके कई वर्षों की मेहनत और शोध का पहला बड़ा पड़ाव हैं।
उत्तराखंड के अल्मोड़ा निवासी युवा नवाचारक रवि टम्टा ने दावा किया है कि उन्होंने भारत का पहला पर्सनल फ्लाइंग व्हीकल (Personal Flying Vehicle) तैयार किया है। रवि के अनुसार उनके प्रोटोटाइप का अल्मोड़ा में सफल परीक्षण भी किया गया है और उन्होंने इसकी उड़ान का प्रदर्शन भी किया।
वही जिसमें रवि ने यह भी स्वीकार किया कि यह तकनीक अभी शुरुआती चरण में है। किसी भी फ्लाइंग व्हीकल को आम लोगों के उपयोग या व्यावसायिक संचालन से पहले कई तकनीकी परीक्षणों, सुरक्षा मानकों और संबंधित सरकारी एजेंसियों की मंजूरी से गुजरना होगा। इसलिए फिलहाल इसे केवल प्रोटोटाइप स्तर का नवाचार माना जा रहा है। हालांकि, उनके दावों की स्वतंत्र पुष्टि और नियामकीय स्वीकृतियां अभी शेष हैं।



