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AI के दौर में संस्कार क्यों ज़रूरी? राज्यपाल ने दिया बड़ा संदेश

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उत्तराखंड: 18 JULY 2026, शनिवार को देहरादून / राजधानी स्थित उत्तराखंड लोक भवन में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने राष्ट्रीय सैनिक संस्था द्वारा आयोजित ‘नई शिक्षा नीति में नैतिक शिक्षा’ विषयक संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग किया। इस अवसर राज्यपाल ने संस्था की ओर से विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सदस्यों को भी सम्मानित किया।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत युवाओं को आधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के साथ-साथ नैतिक शिक्षा और चरित्र निर्माण से भी जोड़ना जरूरी है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत और विश्व गुरु बनने के लक्ष्य को हासिल करने में संस्कारवान युवाओं की अहम भूमिका होगी। राज्यपाल ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा, वेद, उपनिषद और ऋषि-मुनियों की शिक्षाएं नई पीढ़ी को जीवन मूल्यों से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि सत्य, ईमानदारी, निष्ठा और आत्मानुशासन जैसे मूल्य ही राष्ट्र को मजबूत बनाते हैं।

राज्यपाल ने कहा कि नैतिक शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे जीवन में व्यवहार के रूप में अपनाना आवश्यक है। यह उपदेश से नहीं, बल्कि उदाहरण से सीखी जाती है। राज्यपाल ने राष्ट्रीय सैनिक संस्था के सदस्यों से विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में जाकर विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण, राष्ट्र प्रेम, अनुशासन और सेवा की भावना के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिकों के अनुभव का उपयोग शिक्षा संस्थानों में नेतृत्व विकास और नैतिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए किया जाना चाहिए।

राज्यपाल ने राष्ट्रीय सैनिक संस्था को इस दूरदर्शी एवं राष्ट्रोपयोगी आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि संस्था राष्ट्रभक्ति, अनुशासन, सेवा, चरित्र निर्माण और राष्ट्रीय चेतना के संवर्धन के लिए अत्यंत सराहनीय कार्य कर रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि संस्था के ऐसे प्रयास समाज में सकारात्मक मूल्यों के प्रसार तथा युवाओं में राष्ट्रीय दायित्वों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

इस संगोष्ठी में परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती, राष्ट्रीय सैनिक संस्था के अध्यक्ष कर्नल टी पी त्यागी, लेफ्टिनेंट जनरल अश्विनी बक्शी, मेजर जनरल जी के थपलियाल, प्रो नीलम पंवार, श्री राजन छिब्बर, मेजर जनरल ओ पी सोनी सहित राष्ट्रीय सैनिक संस्था के पदाधिकारी, पूर्व सैनिक, शिक्षाविद् तथा विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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