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इस बार महाशिवरात्रि में संतान सुख का वरदान मांगने पहुंची 13 महिलाएं

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उत्तराखण्ड: 17 Feb. 2026 मंगलवार को देहरादून। (वरिष्ठ पत्रकार चंदराम राजगुरु) चकराता: प्राचीन शिव मंदिर लाखामंडल में महाशिवरात्रि का विशेष महत्व है। खासकर निसंतान दंपति की गोद खुशियों से भर जाती है। ऐसी मान्यता है कि मंदिर में धर्मराज युधिष्ठिर द्वारा स्थापित शिव ज्योतिर्लिंग के सामने बैठकर दिव्यजोत के दर्शन एवं रात्रि जागरण से निसंतान दंपति को संतान सुख की प्राप्ति होती है। मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि पिछले दो वर्ष में यहां महाशिवरात्रि में आए 39 निसंतान दंपति को वरदान मिला है। इस बार यहां विभिन्न क्षेत्र से 13 महिलाएं संतान सुख का वरदान मांगने आई। दिल्ली के गौतम नगर से पहुंचे दंपति को पुत्र रत्न की प्राप्ति होने से महादेव का आशीर्वाद लिया।

देवनगरी लाखामंडल की ख्याति देशभर में है। यहां प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि में दो दिवसीय मेला लगता है, जिसे क्षेत्र के लोग श्रद्धा एवं उल्लास के साथ परंपरागत तरीके से मनाते हैं। लोक मान्यता के अनुसार यहां महाशिवरात्रि में कई निसंतान दंपति संतान सुख का वरदान मांगने आते हैं। इस बार विभिन्न क्षेत्र से तेरह महिलाएं संतान सुख की चाह में रात्रि जागरण को आए। स्थानीय परंपरा के अनुरुप महिलाओं ने शिव ज्योतिर्लिंग के सामने बैठकर दिव्य ज्योति के दर्शन किए और उपवास रखा। दिल्ली के गौतमनगर से कपिल शर्मा व अलका शर्मा पुत्र रत्न की प्राप्ति होने से महादेव का आशीर्वाद लेने लाखामंडल मंदिर पहुंचे। दंपति ने बताया कि उनकी शादी को पांच साल से ज्यादा समय हो गया पर कोई संतान नहीं हुई। पांडव कालीन महत्व के शिव मंदिर की महिमा एवं मान्यता के बारे में पता चलने से वह वर्ष 2024 में यहां महाशिवरात्रि में रात्रि जागरण के लिए आए थे। महादेव की कृपा से दंपति को अगस्त 2025 में पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। संतान सुख का वरदान मिलने से वह देवता के दरबार में मत्था टेकने आए।

इसी तरह कुछ अन्य दंपति भी संतान सुख की प्राप्ति से मंदिर में पूजा अर्चना के लिए पहुंचे। इस दौरान मंदिर के पुजारियों व कारिंदो ने उच्च हिमालय क्षेत्र से लाए गए विशेष प्रजाति के वृक्ष पाजा की पत्तियों से बनी शिवरी भक्तजनों को प्रसाद के रुप में वितरण की। मंदिर समिति के अध्यक्ष सुशील गौड़ व कोषाध्यक्ष बाबूराम शर्मा ने बताया कि शिवरात्रि में दूसरे दिन मंदिर में शाम को मुख्य पूजा होने के बाद पाजे की शिवरी बनाते समय निसंतान दंपत्ति ने व्रत एवं उपवास रखकर मंदिर में विधि विधान से महादेव की पूजा अर्चना की। संतान सुख का वरदान मांगने को मंदिर में रात्रि जागरण की मान्यता है। बताया जाता है कि द्वापर युग में अज्ञातवास के दौरान धर्मराज युधिष्ठिर ने लाखामंडल में शिव ज्योतिर्लिंग की स्थापना की थी। महाशिवरात्रि में ज्योतिर्लिंग के पास जलने वाली दिव्यजोत के दर्शन व मौन व्रत रखने से निसंतान दंपति को मनचाहा वरदान मिलता है, जिससे दंपति की गोद खुशियों से भर जाती है।
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इंसेट:-
मंदिर में पूजा अर्चना कर महिलाओं ने मांगा वरदान:
लाखामंडल स्थित प्राचीन शिव मंदिर की धार्मिक मान्यता के चलते इस बार यहां विभिन्न क्षेत्र से 13 महिलाएं संतान सुख का वरदान मांगने पहुंची। शिव मंदिर पुजारी समिति के अध्यक्ष सुशील गौड़ ने बताया कि संतान सुख की चाह में बाहर से आए दंपति में दिल्ली के फरीदाबाद से पारुल जसवाल, सहारनपुर के बिहारीगढ़ से प्रियंका, शामली से आंचल शर्मा, हरिद्वार से मीरा देवी, धामपुर से नीरजा, मसूरी से संगीता राजौरी, टिहरी गढ़वाल से गुड्डी चौहान, विकासनगर से किरन राय, जौनपुर से सीमा रमोला व बबीता और जौनसार से रीता चौहान समेत तेरह महिलाओं ने स्थानीय मान्यता के अनुसार शिव मंदिर में विधि विधान से पूजा अर्चना की। कहते हैं मंदिर में स्वच्छ मन एवं श्रद्धा भाव से आए भक्तजनों की हर मुराद पूरी होती है। इस दौरान स्थानीय लोगों ने महाशिवरात्रि में पाजे से बनी शिवरी की पूजा अर्चना कर उसे घरों के बाहर छत पर टांग दिया। शिवरी को घरों में टांगने से परिवार में सुख समृद्धि एवं खुशहाली आती है। विशेष प्रजाति के वृक्ष पाजे की पत्तियों से बनी शिवरी को घरों में टांगने से कई तरह के कष्ट दूर हो जाते हैं।

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