
न्यूज डेस्क / उत्तराखंड: 06 Jan.2026,मंगलवार को देहरादून । उत्तराखंड ऊखीमठ मे 01 जनवरी 2026, माह के प्रथम सप्ताह गुजर जाने के बाद भी तुंगनाथ घाटी मे मौसम के अनुकूल बर्फबारी न होने से स्थानीय पर्यटन व्यवसाय खासा प्रभावित होने के साथ स्थानीय व्यापारियो का खासा प्रभावित हो गया है। बर्फबारी का आनन्द लेने के लिए देश के विभिन्न प्रान्तो से सैलानी तुंगनाथ घाटी तो पहुंच रहे है । जनवरी महीना बीतने वाला है, लेकिन हिमालय बर्फ से सफेद नजर आने की बजाय काले नजर आ रहे हैं. जहां हिमालय बर्फ के लकदक नजर आते थे। वो बर्फ विहीन हैं. जिसने पर्यावरणविदों और विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।केदारघाटी के ऊंचाई वाले इलाकों में कई दिनों से बादल छाने से पूरे केदारघाटी शीतलहर की चपेट में है. जनवरी महीने के अंतिम हफ्ते में भी हिमालय बर्फ विहीन हैं।
मगर मौसम के अनुकूल बर्फबारी न होने से सैलानियो को वैरंग लौटना पड़ रहा है । 2025 दिसम्बर व जनवरी 2026, माह मे बर्फबारी से लदक रहने वाले बुग्याल बर्फ विहीन होने से प्रकृति मे रूखापन महसूस होने लगा है तथा प्राकृतिक जल स्रोतो के जल स्तर पर भारी गिरावट देखने को मिल रही है ।क्योंकि बर्फबारी से गुलजार रहने वाली घाटियाँ वीरान हो जाती हैं, पर्यटकों की संख्या घट जाती है, और पर्यावरणविदों के लिए चिंता का विषय बनता है, जिससे प्राकृतिक जल स्रोतों पर भी असर पड़ता है, हालांकि, हल्की बर्फबारी की उम्मीद से तापमान में गिरावट और ठंडक महसूस होती है, जिससे आने वाले समय में बर्फबारी के आसार बनते हैं। बारिश और बर्फबारी ने होने से केदारघाटी में जल स्रोत भी अब सूखने लगे हैं।
- पर्यावरणीय चिंता: हिमालय के ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की कमी, जलवायु परिवर्तन का संकेत देती है और पर्यावरणविदों को चिंतित करती है, जो जल स्रोतों के लिए भी समस्या है।
- वीरान घाटियाँ: बर्फ से ढकी रहने वाली जगहें खाली और वीरान दिखती हैं, जिससे वह सौंदर्य और रोमांच कम हो जाता है।
- कभी-कभी ठंड देर से शुरू होती है, जिससे बर्फबारी भी देर से होती है, जिससे पर्यटक निराश होते हैं।
- आगामी उम्मीद: हल्की पश्चिमी विक्षोभ के कारण ऊपरी इलाकों में हल्की बारिश और बर्फबारी की संभावना रहती है, और तापमान गिरने से बर्फबारी की उम्मीद बढ़ती है।



