
देहरादून: जिला चिकित्सालय कोरोनेशन में कार्यशाला का आयोजन: ‘स्वच्छ एवं हरित वातावरण’ से सुदृढ़ होगी बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था
संसाधनों के बेहतर सामंजस्य, कचरे के प्रभावी प्रबंधन और स्वच्छ परिवेश के जरिए स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से जिला चिकित्सालय कोरोनेशन में एक विशेष कार्यशाला (Workshop) का आयोजन किया गया। कार्यशाला में अस्पताल प्रबंधन, चिकित्सा अधिकारियों और कर्मचारियों ने हरित और पर्यावरण-अनुकूल (Eco-friendly) चिकित्सा प्रणाली अपनाने पर जोर दिया।
कचरे में कमी और संसाधनों का अनुकूलतम उपयोग
कार्यशाला के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर विशेष प्रकाश डाला कि आधुनिक चिकित्सा संस्थानों में कचरे (Bio-medical and General Waste) का न्यूनतम उत्पादन और उसका वैज्ञानिक निस्तारण न केवल पर्यावरण के लिए आवश्यक है, बल्कि यह संक्रमण मुक्त और स्वच्छ अस्पताल परिसर की पहली शर्त भी है। संसाधनों के बेहतर तालमेल से न केवल प्रशासनिक कार्यकुशलता बढ़ती है, बल्कि मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी अभूतपूर्व सुधार होता है।
हरित वातावरण से त्वरित स्वास्थ्य लाभ
चिकित्सकों और विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पताल का हरा-भरा और प्रदूषण-मुक्त वातावरण मरीजों की मानसिक और शारीरिक रिकवरी को तेज करता है। कोरोनेशन अस्पताल प्रशासन द्वारा हाल के दिनों में साफ-सफाई और स्वच्छता के स्तर को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए कई कड़े कदम उठाए गए हैं, जिसके तहत वार्डों में नियमित मॉनिटरिंग और सफाई व्यवस्था को प्राथमिकता दी जा रही है।
बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था की ओर बढ़ते कदम
अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि संस्थान का मुख्य ध्येय आम जनता को किफायती और उच्च कोटि की चिकित्सा सुविधाएँ प्रदान करना है। इसके लिए स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और हरित ऊर्जा जैसे आयामों को अस्पताल की दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा रहा है।
इस कार्यशाला के माध्यम से यह संकल्प लिया गया कि कोरोनेशन जिला चिकित्सालय को स्वच्छता और हरित मानकों के मामले में एक आदर्श चिकित्सा संस्थान के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि यहाँ आने वाले प्रत्येक मरीज और तीमारदार को एक स्वस्थ, स्वच्छ और सकारात्मक वातावरण मिल सके।
मौके पर डॉ नौटियाल डॉ एस के झा डॉ कुश एरोन डॉ प्रवीण पंवार नर्सिंग अधीक्षिका एस एन ओ मुख्य प्रशासनिक अधिकारी आदि मौजूद थे



